लखनऊ भारत सरकार का बजट कर्मचारी हित के मामले में निराशाजनक रहा है । पुरानी पेंशन की घोषणा नहीं की गई, कर्मचारी 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुरूप 50%महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय की घोषणा का भी इंतजार कर रहे थे लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ।
आज केंद्रीय बजट पर प्राथमिक प्रतिक्रिया देते हुए फार्मेसिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि देश को वैश्विक बायोफॉर्मा निर्माण केन्द्र के रूप में विकसित करने के लिए बायोफॉर्मा शक्ति बनाया जाने की घोषणा स्वागत योग्य है । बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए अगले पांच वर्षों में इको-सिस्टम का निर्माण और केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को मजबूत किए जाने, 3 नए नाइपर बनने से फार्मा अध्ययन, नवाचार और अनुसंधान क्षेत्र मजबूत होगा ।
उक्त का स्वागत करते हुए श्री यादव ने कहा कि संविदा प्रथा और ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने के स्थान पर बढ़ावा दिया जा रहा है, स्थाई रोजगार सृजन ना होने से तकनीकी योग्यता धारक लोगों को अल्प वेतन और भविष्य की असुरक्षा के बीच कार्य करना पड़ रहा है जो कष्टदायक है ।
कर्मचारी सरकार की नीतियों का पालन करता है और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन कर्मचारियों को हमेशा ही सौतेलेपन का शिकार होना पड़ता है अधिकांश सरकारी कर्मी इस देश के मध्यम वर्ग का नागरिक है जो देश की अर्थव्यवस्था का मूल आधार है । सरकारी कर्मचारी सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाला होता है और सबसे ईमानदारी के साथ आयकर का भुगतान करता है इसलिए हमेशा यह आशा रहती है कि सरकार अपने बजट में सरकारी कर्मचारियों के लिए भी कुछ ना कुछ राहत देगी और उनके विकास के लिए कुछ ना कुछ योजना लेकर आएगी । वित्त मंत्री जी के अनुसार नया आय कर अधिनियम, 2025, दिनांक 01 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो जाएगा, लेकिन प्रथमदृष्ट्या कर्मचारियों को इससे कोई लाभ नहीं दिख
रहा ।
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