Breaking News
Home / Poll / योगी सरकार में निजी स्कूलों में बुक ,फिस ड्रेस ,की मनमानी उत्तर प्रदेश जनता परेशान

योगी सरकार में निजी स्कूलों में बुक ,फिस ड्रेस ,की मनमानी उत्तर प्रदेश जनता परेशान


डा बेचन प्रसाद यादव

उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद संभालतेही सभी माफिया हुई नर मस्क लेकिन निजी विद्यालय पर नहीं लग रहा लगम वहीं हाल संतकबीरनगर जिले में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत होते ही अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते व्यवसायीकरण ने मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों की कमर तोड़ दी है। शहर के अधिकांश निजी स्कूलों में हर साल जानबूझकर पाठ्यपुस्तकें बदल दी जा रही हैं, जिससे पुराने छात्रों की किताबें नए छात्रों के किसी काम नहीं आ रहीं।

पुरानी किताबों का बाजार खत्म, कमीशन का खेल शुरू

पहले के समय में छोटे भाई-बहन अपने बड़े भाई-बहनों या पड़ोसियों की पुरानी किताबों से पढ़ाई कर लिया करते थे, जिससे खर्च आधा हो जाता था। लेकिन अब निजी स्कूलों ने पब्लिशर्स के साथ मिलकर ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि हर साल सिलेबस में मामूली बदलाव कर नया ‘एडिशन’ बाजार में उतार दिया जाता है।

अभिभावक अजीत मिश्र से बात किया गया तो उन्होंने बताया “मेरा बड़ा बेटा चौथी कक्षा में है और बेटी तीसरी में। पिछले साल की किताबें इस साल बेकार हो गई हैं क्योंकि स्कूल ने पब्लिशर बदल दिया है। हर साल 5 से 10 हजार रुपये सिर्फ किताबों और कॉपियों पर खर्च हो रहे हैं।” स्कूल NCERT की सस्ती किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य करते हैं।

स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों पर किताबों का पूरा ‘सेट’ लेना पड़ता है, जिसमें गैर-जरूरी डायरी और कॉपियां भी शामिल होती हैं। पिछले दो वर्षों में किताबों की कीमतों में 20% से 30% तक का इजाफा हुआ है।

नियमों के मुताबिक, कोई भी स्कूल किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता और न ही अनावश्यक रूप से सिलेबस बदल सकता है। हालांकि, धरातल पर इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शिक्षा विभाग की सुस्ती का फायदा निजी स्कूल प्रबंधन उठा रहे हैं।

शिक्षाविदों का मानना है कि अगर सरकार सख्ती से सभी निजी स्कूलों में NCERT की किताबें लागू कर दे, तो शिक्षा के खर्च में 70% तक की कमी आ सकती है। इससे न केवल आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी एकरूपता आएगी।

यदि समय रहते प्रशासन ने इस ‘शिक्षा माफिया’ पर लगाम नहीं लगाई, तो गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों की दहलीज पार करना नामुमकिन हो जाएगा। अभिभावक अब एकजुट होकर प्रशासन से इस मनमानी को रोकने की गुहार लगा रहे हैं।

About Adap News

Check Also

पशु चिकित्सा फार्मेसिस्ट संघ का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न

🔊 पोस्ट को सुनें   लखनऊ, पशु चिकित्सा फार्मेसिस्ट संघ उत्तर प्रदेश का आज दिनांक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Best WordPress Expert Digital Nisar