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इलेक्ट्रो होम्योपैथी व होम्योपैथी में अंतर


इलेक्ट्रो होम्योपैथी व होम्योपैथी में अंतर

डा बेचन प्रसाद यादव

1.इलेक्ट्रोपैथी या इलेक्ट्रोहोम्योपैथी

की खोज 1865 में हुई तथा इसके खोजकर्ता डाक्टर काउंट सीजर मैटी जी जो इटली के रहने वाले थे।

1. होम्योपैथी की खोज 1776 में हुई तथा इसके खोजकर्ता डाक्टर सेमुअल फेड्रिक क्रिश्चियन हैनीमेन जी है जो जर्मनी के रहने वाले हैं।

2. इलेक्ट्रोहोम्योपैथी में औषधियां केवल औषधिय एवं विषहीन पेड़ पौधों से निर्मित की जाती है।

 

2. होम्योपैथी में वनस्पति जगत के विषयुक्त पौधों से विषहीन पौधे से एनिमल किंगडम से नोसोडस यानी रोग के बीज से सारकोडस यानी स्वस्य जीव की ग्रंथि, श्राव एवं उनके ऊतकों से मिनरल किंगडम यानि धातुओं से रासायनिक पदार्थों से लवण से तथा ऊर्जा श्रोत यानी क्ष रश्मि, सूर्य, चन्द्र रश्मियां आदि से निर्मित की जाती हैं।

3. इलेक्ट्रोहोम्योपैथी औषधियों के निमार्ण प्रयुक्त होने वाले माध्यम केवल असुत जल का प्रयोग किया जाता है

3. होम्योपैथी दवाओं के निर्माण में अल्कोहल, रेक्टिफाइड स्प्रिट, डिपेंसिंग अल्कोहल व शुगर आफ मिल्क का प्रयोग किया जाता है।

4. इलेक्ट्रोहोम्योपैथी औषधियों में शक्तिकरण का तरीका प्रथम डाइलूशन स्पेजरिक एसेंस व माध्यम आशुत जल द्वारा क्रमशः 1:9 के अनुपात में मिश्रण द्वारा तैयार किया जाता है तथा आगे के डाइलूशन स्पेजरिक एसेंस प्रथम डाइलूशन व आशुत के क्रमशः 1:47 के अनुपात में मिश्रण द्वारा प्राप्त किया जाता है।

4. *होम्योपैथी* में दवाओं का निर्माण मुख्यतः तीन स्केलों के आधार पर किया जाता है – अ. डेसिमल स्केल जिसमे आवश्यक ड्रग व माध्यम शुगर आफ मिल्क, डिस्पेंसिंग अल्कोहल को क्रमशः 1: 9 में मिश्रित किया जाता है तथा इस प्रकार से प्राप्त दवाओं के पीछे ट्रेड मार्क (X) प्रयुक्त किया जाता है।

ब. सेंटीसिमल स्केल – इस स्केल में दवाओं के निर्माण में आवश्यक ड्रग व माध्यम को 1:99 में लिया जाता है।

स. 50 मिलीसिमल स्केल – इसमें आवश्यक ड्रग व माध्यम 1:50000 के अनुपात में तैयार किया जाता है इस स्केल पर वर्तमान में दवाएं तैयार नहीं की जाती हैं।

शुगर आफ मिल्क – इसका प्रयोग दवाओं के शक्तिकरण के लिए किया जाता है इस विधि को होम्योपैथी की भाषा में trituration कहते हैं यह विधि धातु पदार्थ व अल्कोहल में आधुलनशील पदार्थों पर लागू की जाती है।

5. इलेक्ट्रोहोम्योपैथी में औषधियो का प्रयोग

1.रोगी के मुख द्वारा

2.रोगी के चर्म द्वारा मरहम व कंप्रेश ।

3. रोगी के उपचर्म में सुई भेदन द्वारा किया जाता है।

होम्योपैथी में दवाओं का प्रयोग केवल मुख द्वारा व चर्म द्वारा केवल मरहम का प्रयोग किया जाता है।

6. इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का सिद्धांत – इसमें बहु औषधियों एक साथ प्रयोग में लाई जाती हैं तथा औषधियां सदैव रोग व लक्षण के विपरीत प्रयोग की जाती हैं। इसका मुख्य सिद्धांत कॉम्प्लेक्सिया, कॉम्प्लेक्सिस, क्यूरेंटर है।

6. होम्योपैथी का सिद्धांत लक्षणों के अनुसार प्रयोग में लाई जाती है।

इस सिद्धांत को सीमिलिया, सिमिलीबस, क्यूरेंटर है।

 

7. इलेक्ट्रो होम्योपैथी औषधियों के प्रयोग से मानव शरीर पर इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और लाभ न होने पर मल मूत्र और पसीने के माध्यम से स्वतः बाहर निष्काशित हो जाता है।

 

7. होम्योपैथी में दवाओं के द्वारा उच्च शक्ति में देने पर लक्षण के अनुरूप रोग में वृद्धि संभव है।

8. इलेक्ट्रो होम्योपैथी में औषधियों का परीक्षण रोगी पर किया जाता है।

8. होम्योपैथी में दवाओं का प्रयोग स्वस्थ्य मनुष्य पर किया जा है।

और डॉ काउंट सीजर मैटी जी की विशेषता है और यही होम्योपैथी , एवं आयुर्वेद एवं इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा विज्ञान में सबसे बड़ा अंतर है क्योंकि होम्योपैथी में जब बेलाडोना का मदर टीचर तैयार करके प्रयोग किया जाता है तब वह काम तो करती है परंतु उसमें एग्रीवेशन की संभावना रहती हैं। और यही पर होम्योपैथी का सिंगल मेडिसिन का सिद्धांत लागू होता हैं 2 या 2 से अधिक मदर टीचर को आपस में मिलाया नहीं जा सकता परन्तु जब हम इलेक्ट्रो होम्योपैथी स्पेजिरिक का उपयोग करते हैं तब हम डी 3 या डी 4 डिस्टिलेशन द्वारा तैयार की ही औषधीयो जो 2 या 2 से अधिक स्पेजरिक पौधों को आपस में मिलाया जाता है तब वह बिना शरीर को नुकसान पहुंचाए अधिक कारगर होती है

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