करोड़ों की हेराफेरी पर डीएम की सख्ती दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रधानों पर गिरेगी गाज ग्राम निधि-6 में वित्तीय अनियमितता उजागर, वसूली न होने पर दर्ज होगी FIR
संतकबीरनगर: स्वच्छता मद से करोड़ों रुपये की गड़बड़ी उजागर होने के बाद जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। त्रिस्तरीय जांच समिति और सीडीओ की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होते ही डीएम ने तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम प्रधानों पर विभागीय कार्यवाही, वसूली तथा एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए DM के सख्त आदेश
सरकारी धन का करोड़ों रुपये का अनियमित हस्तांतरण और आहरण साबित
तत्कालीन सचिव शिवप्रकाश सिंह पर रोक के बावजूद फर्मों को भुगतान का गंभीर आरोप, कार्रवाई पुनः होगी शुरू।
बिना कार्य कराए गबन की नीयत से दी गई राशि सात दिन में जमा करानी होगी, अन्यथा दर्ज होगी एफआईआर।
30 ग्राम पंचायतों में ग्राम निधि-6 में न जमा की गई राशि की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों व सचिवों पर तय।
तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी के खिलाफ शासन को भेजा जाएगा पत्र
सभी 9 ब्लॉकों के एडीओ पंचायत पर विभागीय जांच, जिसकी निगरानी करेंगे एडीएम (न्यायिक)।
दोषी फर्में ब्लैकलिस्ट होंगी और उनसे धनराशि की वसूली की जाएगी।
दोषी पटल सहायक को सेवा से पदच्युत करने का प्रस्ताव।
ब्लॉकवार जांच सूची
विकासखंड खलीलाबाद – सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी: अनिल कुमार सिंह, कौशल कुमार सिंह, चन्द्र प्रकाश सिंह, अनिल सिंह, आनन्द कुमार, कमलेशपति त्रिपाठी, किशन कुमार।
जांच अधिकारी: एएसडीएम (खलीलाबाद) हृदय राम तिवारी।
विकासखंड सेमरियावां – सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी: मोहम्मद अफजल, सुनीता मिश्रा।
जांच अधिकारी: एएसडीएम सुधीर कुमार।
विकासखंड सांथा – सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी: आनन्द कुमार।
जांच अधिकारी: एएसडीएम सुधीर कुमार।
विकासखंड बेलहरकला – सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी: सुशील सिंह, चंदन सिंह।
जांच अधिकारी: एएसडीएम रविकान्त चौबे।
विकासखंड बघौली – सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी: कंचन मिश्रा, शिवमूरत मौर्या।
जांच अधिकारी: एएसडीएम सुधीर कुमार।
विकासखंड पौली – सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी: आनन्द कुमार।
जांच अधिकारी: एएसडीएम रविकान्त चौबे।
विकासखंड हैंसर बाजार – सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी: शैलजा मिश्रा।
जांच अधिकारी: एएसडीएम रविकान्त चौबे।
डीएम का स्पष्ट संदेश डीएम आलोक कुमार ने कहा –
“गबन और वित्तीय अनियमितता में शामिल किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच अधिकारी दो माह की समयसीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करें
यह पहली बार है जब जिले में इतनी बड़ी धनराशि की अनियमितता पर सीधी और व्यापक कार्रवाई की जा रही है।
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