संत कबीर नगर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रांतीय रक्षक दल के स्वयं सेवकों द्वारा मार्च पास्ट को कलेक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
प्रांतीय रक्षक दल के स्वयंसेवकों द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर से कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम तक मार्च पास्ट किया गया। पीआरडी जवानों के दो प्लाटूनों का नेतृत्व क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रा. वि. द.अधिकारी रितेश वर्मा ने किया।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 07 नवंबर 1875 को बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा लिखित गीत को सर्वप्रथम 1896 के अधिवेशन में रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा गाया गया। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का नारा बना। नरम दल, गरम दल के नेताओं के साथ-साथ क्रांतिकारियों ने भी वन्दे मातरम् को स्वतंत्रता मंत्र के रूप में इस्तेमाल किया। सन् 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह गीत आंदोलन की प्रेरणा बना। लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, अरविंद घोष और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने इसे अपने आंदोलनों में अपनाया।
स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय गीत के रूप में “वंदे मातरम्” को 24 जनवरी 1950 को मान्यता मिली। मूल रूप से यह गीत संस्कृत और बांग्ला में लिखी गई थी।
पीआरडी जवानों के मार्च पास्ट के आयोजक जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी रामप्रताप सिंह ने वंदे – मातरम् के महत्व को रेखांकित करते हुए मार्च पास्ट में प्रतिभाग किए पीआरडी जवानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
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