लखनऊ मनरेगा कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय से मिला।
इस अवसर पर राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय सचिव विजय श्रीवास्तव, प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य विक्रम सिंह, तराई क्षेत्र के अध्यक्ष पी. के. पाठक तथा विद्याकांत शर्मा भी उपस्थित रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने मनरेगा कर्मियों को अपने कार्य के दौरान आ रही विभिन्न समस्याओं से प्रदेश अध्यक्ष को अवगत कराया तथा मांग की कि मनरेगा कर्मियों के वेतन में वृद्धि की जाए, वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर किया जाए, कार्य के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट उपलब्ध कराए जाएं, घर से कार्यस्थल की दूरी को युक्तिसंगत किया जाए तथा मनरेगा कर्मियों के लंबित भविष्य निधि भुगतान का समय से निस्तारण कराया जाए।
प्रदेश मीडिया प्रभारी मयंक त्रिवेदी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि मनरेगा कर्मियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, उनके बच्चों की शिक्षा से जुड़ी सहायता तथा भविष्य की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को “जी-राम-जी” के नाम से संबोधित किए जाने पर स्वागत व्यक्त करते हुए यह मांग भी की कि वर्तमान 100 दिन के स्थान पर 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाए, जिससे कर्मियों और मजदूरों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि मनरेगा कर्मियों की मांगें पूरी तरह जायज हैं। राष्ट्रीय लोकदल हमेशा श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार से मिलकर मनरेगा कर्मियों की वेतन वृद्धि, सुविधाओं और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी सभी मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा, ताकि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित हो सके।
इसके उपरांत राष्ट्रीय सचिव विजय श्रीवास्तव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसमें कार्यरत कर्मियों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राष्ट्रीय लोकदल मनरेगा कर्मियों को सम्मानजनक वेतन, सुविधाएं और सुरक्षित भविष्य दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।
अंत में प्रदेश उपाध्यक्ष आदित्य विक्रम सिंह ने कहा कि मनरेगा कर्मी वर्षों से ग्रामीण विकास की मजबूत नींव बने हुए हैं, लेकिन आज वही वर्ग उपेक्षा का शिकार है। राष्ट्रीय लोकदल उनकी आवाज बनकर सरकार तक उनकी समस्याएं पहुंचाएगा और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
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