बड़ी खबर: 89 दिन का ‘फर्जी खेल’ खत्म! सुप्रीम कोर्ट की बड़ी चोट—अब ‘कच्चे’ कर्मचारियों को पक्का होने से नहीं रोक पाएगा विभाग!
नमस्कार साथियों, मैं हूँ आपका डा बेचन यादव
आज की खबर उन लाखों कच्चे कर्मचारियों और ठेका मजदूरों के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है, जिन्हें विभाग हर 89 दिन बाद एक दिन के लिए नौकरी से हटा देता था और फिर अगले दिन दोबारा रख लेता था। इस चालाकी को कानून की भाषा में ‘आर्टिफिशियल ब्रेक’ (Artificial Break) कहा जाता है, जिसका मकसद सिर्फ आपको पक्का होने से रोकना था।
लेकिन अब अदालत ने इस पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है!
अदालत ने क्या कहा? (आसान भाषा में समझें)
अदालत ने विभागों और सरकारों की इस मंशा पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि:
यह सरासर धोखाधड़ी है: 89 दिन बाद हटाकर दोबारा रखना कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हक को मारने की एक “धोखाधड़ी” (Fraud) है।
सर्विस में निरंतरता (Continuity of Service): कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगर काम वही है और कर्मचारी भी वही है, तो बीच के उस एक-दो दिन के ब्रेक को गिना नहीं जाएगा। आपकी नौकरी को “लगातार” माना जाएगा।
240 दिन का नियम: अब विभाग यह बहाना नहीं बना पाएंगे कि आपकी सर्विस में ब्रेक था, इसलिए आप पक्का होने या लाभ पाने के हकदार नहीं हैं।
इस फैसले से आपको क्या फायदा होगा?
रेगुलराइजेशन का रास्ता साफ: पक्का होने के लिए जो 10 साल या 240 दिन की शर्त होती है, उसे पूरा करना अब आसान होगा क्योंकि विभाग ‘ब्रेक’ दिखाकर आपकी वरिष्ठता (Seniority) खत्म नहीं कर पाएगा।
अनुभव का पूरा लाभ: आपकी सर्विस की गिनती पहले दिन से होगी, न कि आखिरी बार दोबारा जॉइन करने वाले दिन से।
कानूनी सुरक्षा: अब अगर कोई विभाग आपको सिर्फ ‘ब्रेक’ देने के लिए हटाता है, तो आप इस फैसले के आधार पर कोर्ट से स्टे ले सकते हैं।
डा बचेन यादव की बेबाक राय:
साथियों, विभाग यह खेल सालों से खेल रहे थे ताकि उन्हें आपको पक्का न करना पड़े या ईपीएफ (EPF) जैसी सुविधाएं न देनी पड़ें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून की आंखों में धूल झोंकना अब संभव नहीं है। यह उन अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश है जो मजदूरों के पसीने की कमाई और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं।
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