लखनऊ पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के प्रांतीय नेतृत्व के निर्देशों के क्रम में लखनऊ के सरोजिनी नायडू पार्क स्थित कर्मचारी प्रेरणास्थल पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करके जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को संयुक्त परिषद का पांच भागों में विभक्त ज्ञापन भेजा गया।
धरना प्रदर्शन की अध्यक्षता संयुक्त परिषद के जिला अध्यक्ष नितिन गोस्वामी ने किया जबकि संचालन जिला मंत्री वीरेंद्र तिवारी ने किया ।मुख्य अतिथि के रूप में संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जे एन तिवारी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला उपस्थित थी।
धरना स्थल पर उपस्थित 300 से भी अधिक विभिन्न विभागों के कर्मचारियों एवं आशा बहुओं को संबोधित करते हुए संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया कि कर्मचारियों के प्रति सरकार की उपेक्षा से क्षुब्ध होकर संयुक्त परिषद ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया है।
मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक कर्मचारी संगठन के साथ विगत 2 वर्ष से कोई वार्ता नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण कर्मचारियों की उचित समस्याओं का भी निराकरण नहीं हो पा रहा है। संयुक्त परिषद के काफी प्रयासों के बाद आउटसोर्स कर्मियों के लिए निगम का गठन तो हो गया ,लेकिन अभी तक इसका फायदा आउटसोर्स कर्मचारियों को नहीं मिल सका है। किसी भी आउटसोर्स कर्मी को अभी तक न्यूनतम मानदेय नहीं दिया गया है। महानगरीय सेवाओं के 1000 से अधिक कर्मचारी सेवा से हटाए जा चुके हैं।
उनको इलेक्ट्रिक बसों पर समायोजित किए जाने के कार्मिक विभाग के निर्देशों के अनुसार कार्यवाही नहीं की जा रही है। परिवहन निगम में सरकारी संपत्ति को बेचे जाने का सिलसिला जारी है एवं डग्गामारी चरम पर है। आशा बहुओं को पिछले चार माह से उनके मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है ,जिसके कारण अल्प मानदेय पाने वाली आशा बहुएं भुखमरी की कगार पर है।
पुरानी पेंशन बहाली, कैशलेस चिकित्सा का सरलीकरण, रिक्त पदों को भरा जाना, पदोन्नति के पदों पर पदोन्नतियां किया जाना, खाद्य रसद, राजस्व ,चिकित्सा स्वास्थ्य,माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा सहित कई विभागों के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों पर मुख्य सचिव समिति द्वारा निर्णय किया जाना, सिंचाई विभाग में निष्प्रयोज्य किए गए पदों को पुनर्स्थापित किए जाने का आदेश किया जाना, शिक्षणेत्र कर्मियों को सेवानिवृत्ति पर 300 दिनों का अवकाश दिया जाना, अनुसूचित प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अनुदान सूची में लिया जाना आदि मांगों पर लगातार अनुरोध के बावजूद भी निर्णय नहीं हो रहा है। पदाधिकारियों का उत्पीड़न किए जाने की घटनाएं भी निरंतर बढ़ती जा रही हैं। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष ने कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण नहीं किए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए आज के धरना प्रदर्शन में आर पार के आंदोलन का ऐलान किया है।
उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री प्रशासनिक अधिकारियों के कार्य प्रणाली की समीक्षा करें एवं कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों पर शीघ्र निर्णय कराएं। संयुक्त परिषद ने सरकार को मांगों का निस्तारण कराए जाने के लिए 8 नवंबर तक का समय दिया है ।
8 नवंबर से आंदोलन का तीसरा चरण शुरू होगा जिसमें मंडल एवं जनपद स्तर पर संयुक्त परिषद के प्रांतीय पदाधिकारी सम्मेलन गोष्ठियां एवं प्रेस वार्ता कर कर्मचारियों की मांगों के प्रति सरकार की उदासीनता से अवगत कराएंगे एवं 20 जनवरी को विधानसभा पर विशाल धरना प्रदर्शन के लिए कर्मचारियों को तैयार करेंगे ।
धरना प्रदर्शन कार्यक्रम को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला, उपाध्यक्ष शिवाकांत द्विवेदी, ओमप्रकाश पांडे, यू पी फूड और सिविल सप्लाईज इंस्पेक्टर्स ऑफिसर्स एसोसिएशन के महामंत्री त्रिलोकी नाथ चौरसिया सेंट्रल रीजनल वर्कशॉप कर्मचारी संघ के महामंत्री जसवंत सिंह, फेडरेशन ऑफ़ यूपी मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के महामंत्री विनोद कनौजिया बुद्धिराम, राजकीय राजकीय प्रेस मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुनील कुमार मिश्रा , आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष कुसुम लता यादव ,सरला सिंह , सीमा यादव, ममता सिंह ,नगरीय परिवहन संविदा कर्मचारी संयुक्त परिषद की इकाई के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ,महामंत्री गोविंद कुमार सहित कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया।
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