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बुद्ध की शिक्षाएं न्यायपूर्ण एवं मानवीय समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं – गुरु प्रसाद मदन एडवोकेट


गोरखपुर, उत्तर प्रदेश दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इण्डिया (भारतीय बौद्ध महासभा), उत्तर प्रदेश-पूरब के तत्वावधान में जिला अधिवक्ता बार एसोसिएशन, कलेक्ट्रेट कचहरी, गोरखपुर में धम्म विजय दशमी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में त्रिशरण एवं पंचशील के माध्यम से भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को आत्मसात करने, बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार, सामाजिक समरसता, शिक्षा, समानता और मानवता की सेवा का संदेश दिया गया। इस अवसर पर सामाजिक, खेल, पत्रकारिता एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्राट अशोक अवार्ड से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में पूज्य भन्ते विनय कीर्ति, भन्ते संघदीप, भन्ते शान्त कुमार एवं भन्ते जीवक का सानिध्य प्राप्त हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के अधिवक्ता गुरु प्रसाद मदन तथा मुख्य वक्ता के रूप में सहायक नगर आयुक्त, गोरखपुर सुरेन्द्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता जिला अधिवक्ता बार एसोसिएशन, कलेक्ट्रेट कचहरी, गोरखपुर के पूर्व जिला महामंत्री अधिवक्ता लालमन ने की। स्वागत भाषण दुर्गेश चौधरी एडवोकेट, जिला सचिव बीएसआई गोरखपुर ने दिया तथा संचालन डॉ. अनिल कुमार गौतम, केंद्रीय मीडिया सदस्य, बीएसआई ने किया।

समारोह में पूज्य भन्ते विनय कीर्ति, भन्ते संघदीप, भन्ते शान्त कुमार एवं भन्ते जीवक के सानिध्य में त्रिशरण एवं पंचशील की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं व्यक्ति को प्रज्ञा, करुणा, मैत्री, अहिंसा और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। बौद्ध धम्म केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को विवेकपूर्ण जीवन जीने, दूसरों के दुख को समझने और समाज में समानता स्थापित करने का मार्ग दिखाता है।

वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में भगवान बुद्ध के विचार और अधिक प्रासंगिक हैं। समाज में व्याप्त भेदभाव, अंधविश्वास, हिंसा और वैमनस्य को समाप्त करने के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आपसी सद्भाव तथा मानवीय मूल्यों को अपनाना आवश्यक है। त्रिशरण एवं पंचशील के सिद्धांतों को जीवन में उतारकर व्यक्ति अपने आचरण को बेहतर बना सकता है और एक शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान दे सकता है।

समारोह में सम्राट अशोक के जीवन और उनके ऐतिहासिक योगदान पर विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि कलिंग युद्ध में हुई व्यापक जनहानि से सम्राट अशोक गहरे रूप से प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने हिंसा और युद्ध के स्थान पर धम्म, अहिंसा, करुणा तथा जनकल्याण को प्राथमिकता दी और बौद्ध धम्म अपनाया। उन्होंने बौद्ध विचारों के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित किया तथा अपने शासन में नैतिकता, सहिष्णुता और प्रजा के कल्याण को महत्वपूर्ण स्थान दिया।

वक्ताओं ने कहा कि सम्राट अशोक का जीवन इस बात का उदाहरण है कि शक्ति और विजय का वास्तविक उद्देश्य दूसरों पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और शांति की स्थापना होना चाहिए। धम्म विजय दशमी का संदेश भी इसी भावना से जुड़ा है कि हिंसा पर अहिंसा, घृणा पर प्रेम और भेदभाव पर समानता की विजय हो।

दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इण्डिया के पदाधिकारियों ने संगठन के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय बौद्ध महासभा बौद्ध धम्म की शिक्षाओं, सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, सांस्कृतिक चेतना और समानता के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन का उद्देश्य भगवान बुद्ध के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज में तर्कशीलता, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है।

पदाधिकारियों ने कहा कि बौद्ध धम्म का मूल संदेश मानव कल्याण है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, शिक्षा और समान अवसर मिलना चाहिए। संगठन के कार्यकर्ताओं को गांवों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बुद्ध के विचारों का प्रचार करना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी को करुणा, मैत्री और नैतिकता का महत्व समझ में आए।

मुख्य अतिथि गुरु प्रसाद मदन एडवोकेट ने सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक आदर्श समाज वही है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान मिले और किसी के साथ जाति, वर्ग अथवा सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो। भगवान बुद्ध की शिक्षाएं न्यायपूर्ण एवं मानवीय समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्य वक्ता सुरेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक नगर आयुक्त, गोरखपुर ने सामाजिक जिम्मेदारी, नागरिक कर्तव्यों और मानवीय मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने बुद्ध के विचारों को दैनिक जीवन में अपनाने तथा समाज में शांति, स्वच्छता, सद्भाव और सहयोग की भावना विकसित करने का संदेश दिया।

अध्यक्षीय संबोधन में अधिवक्ता लालमन ने सामाजिक एकता, नैतिकता और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और लोगों को महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. अनिल कुमार गौतम, केंद्रीय मीडिया सदस्य बीएसआई ने धम्म विजय दशमी के महत्व, सम्राट अशोक के धम्म परिवर्तन और भारतीय बौद्ध महासभा की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए समारोह के उद्देश्यों को रेखांकित किया।

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्राट अशोक अवार्ड से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई।

**सामाजिक क्षेत्र:** विचण्डी प्रसाद, सुरेन्द्र प्रताप सिंह एवं गुरु प्रसाद मदन एडवोकेट।

**खेल क्षेत्र:** परबीन, कबीर जी, विजय भास्कर, दीप मौर्य, अमितेश कुमार आनंद एवं शगुन कुमारी।

**पत्रकारिता क्षेत्र:** डॉ. अनिल गौतम, सेराज अहमद कुरैशी, सुशील कुमार, अजीत कुमार यादव, डॉ. मनोज कुमार मिश्रा एवं रमेश कुमार चौहान।

**कला क्षेत्र:** राजकुमार पगला, शम्भू भाण श्रीवास्तव, अशोक यादव बौद्ध एवं वीरेन्द्र कुमार अम्बेडकर।

वक्ताओं ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लिए कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने से अन्य लोगों को भी सकारात्मक कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। ऐसे सम्मान समारोह सामाजिक योगदान को पहचान देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करते हैं।

समारोह का मुख्य संदेश रहा कि भगवान बुद्ध की करुणा, मैत्री और प्रज्ञा, सम्राट अशोक की धम्म नीति तथा दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इण्डिया के सामाजिक उद्देश्यों को अपनाकर एक समानतापूर्ण, शांतिपूर्ण और मानवतावादी समाज का निर्माण किया जा सकता है।

कार्यक्रम में विचण्डी प्रसाद, महेन्द्र कीर्ति, रामचन्द्र बौद्ध, श्रवण कुमार पटेल, सुरेन्द्र भारती, डॉ. अजय प्रकाश गौतम, लाल बहादुर बौद्ध ने भी सम्बोधित किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से आनंद जीत लाल, पशुपतिनाथ रविकुल, नरसिंह, अरविन्द कुमार, पत्रकार आशुतोष कुमार,श्री नारायण, अनीस आजाद एडवोकेट, सीमा यादव आज़ाद, अनिता बौद्ध, विमला बौद्ध, कांति बौद्ध, इंद्रावती, ज्ञान्ति, दुर्गावती सहित सैकड़ो उपासक /उपसिका मौजूद रहें।

कार्यक्रम के आयोजक सतीश चन्द्र बौद्ध, ट्रस्टी एवं प्रदेश अध्यक्ष, दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इण्डिया, उत्तर प्रदेश-पूरब ने सभी अतिथियों, भन्तेगण, सम्मानित प्रतिभाओं, पदाधिकारियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार, सामाजिक जागरूकता तथा भगवान बुद्ध के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

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