लखनऊ विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर फार्मासिस्ट फेडरेशन द्वारा 25 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में वैज्ञानिक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम अपराह्न 2:30 बजे से होगा।
इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस की थीम “Empowering pharmacists for healthier futures” — “स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना” निर्धारित की गई है। अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) के अनुसार यह थीम फार्मासिस्टों को आवश्यक दक्षता, मान्यता और स्वास्थ्य व्यवस्था में उचित भूमिका प्रदान करने पर केंद्रित है।
दो प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञ होंगे चीफ गेस्ट
कार्यक्रम में डॉ. एच. एन. त्रिपाठी, निदेशक, मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ तथा डॉ. जी. पी. गुप्ता, निदेशक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल चिकित्सालय, लखनऊ एवं अपर निदेशक, लखनऊ मंडल चीफ गेस्ट के रूप में सहभागिता करेंगे।
सेमिनार में फार्मासिस्टों की बदलती भूमिका, औषधि सुरक्षा, फार्माकोविजिलेंस, ADR रिपोर्टिंग, अस्पतालों में मेडिकेशन सेफ्टी, एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप तथा रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्ट की भूमिका जैसे विषयों पर वैज्ञानिक चर्चा की जाएगी।
फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के पूर्व चेयरमैन सुनील यादव ने विश्व फार्मासिस्ट दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेश के सभी फार्मासिस्टों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही पूर्ण स्वास्थ्य की अवधारणा को साकार करता है और इस दिशा में फार्मासिस्ट की भूमिका लगातार विस्तृत हो रही है।
उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट केवल औषधि उपलब्ध कराने वाला स्वास्थ्यकर्मी नहीं, बल्कि औषधियों का विशेषज्ञ एवं महत्वपूर्ण ड्रग काउंसलर भी है। औषधि की खोज एवं निर्माण से लेकर उसके गुणवत्ता नियंत्रण, उचित भंडारण, वितरण, सही उपयोग, रोगी को परामर्श तथा प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया की पहचान एवं रिपोर्टिंग तक फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सुनील यादव ने कहा कि फार्मेसी एक बहुआयामी क्षेत्र है। अनुसंधान संस्थानों में वैज्ञानिक, औषधि विश्लेषक, फार्मास्यूटिकल उद्योग में विभिन्न भूमिकाओं में कार्यरत फार्मासिस्ट, औषधि नियमन व्यवस्था में कार्यरत विशेषज्ञ, शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, अस्पताल फार्मासिस्ट, क्लिनिकल फार्मासिस्ट, मेडिकल स्टोर फार्मासिस्ट और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत फार्मासिस्ट मिलकर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि फार्मासिस्टों के प्रशिक्षण में फार्मास्युटिक्स, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, टॉक्सिकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फिजियोलॉजी, ड्रग स्टोर मैनेजमेंट सहित अनेक विषय शामिल हैं। औषधि के निर्माण से लेकर उसके सुरक्षित उपयोग और शरीर में उसके प्रभाव तथा ADME (Absorption, Distribution, Metabolism and Excretion) की वैज्ञानिक समझ फार्मेसी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।अस्पतालों में फार्मासिस्ट की भूमिका को और मजबूत करने की आवश्यकता उन्होंने कहा कि बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप फार्मासिस्टों के ज्ञान, कौशल और दक्षताओं का निरंतर विस्तार आवश्यक है। साथ ही अस्पतालों में रोगी-केंद्रित फार्मेसी सेवाओं को मजबूत करने तथा उपयुक्त मानव संसाधन और कार्य-अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।सुनील यादव ने कहा कि “जहां औषधियां जीवन देती हैं, वहीं फार्मासिस्ट औषधियों को जीवन देते हैं।” इसलिए आम जनता को अपनी दवाओं के संबंध में सही जानकारी, सेवन की विधि, संभावित प्रतिकूल प्रभाव और सावधानियों के लिए योग्य फार्मासिस्ट से भी परामर्श लेना चाहिए उन्होंने कहा कि प्रदेश का फार्मेसी समाज स्वास्थ्य सुरक्षा के व्यापक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य कर रहा है। आवश्यकता है कि फार्मासिस्टों की विशेषज्ञता का स्वास्थ्य व्यवस्था में और अधिक प्रभावी उपयोग किया जाए तथा उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर मिलें फार्मासिस्ट फेडरेशन द्वारा विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में वैज्ञानिक, शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सुरक्षित एवं तर्कसंगत औषधि उपयोग, रोगी सुरक्षा और फार्माकोविजिलेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया गया है।
उत्तर प्रदेश में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में लगभग 7500 पद हैं
जिसमें हजार से अधिक पद खाली हैं
प्रदेश में कुल 2.5 लाख पंजीकृत फार्मेसिस्ट हैं ।
चिकित्सालयों में कार्य की अधिकता को देखते हुए कम से कम 10000 पद चाहिए ।
फार्माकोविजिलेंस, क्लिनिकल फार्मेसिस्ट के नए पद सृजित किए जाएं
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