49 बच्चों को टी-शर्ट, लोअर, मिठाई एवं फुलझड़ियां देकर किया खुशियों से सराबोर, बच्चों के बीच मनाया विशेष उत्सव।
सेराज अहमद कुरैशी
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का ही नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद एवं वंचित लोगों के जीवन में खुशियों का उजाला फैलाने का भी संदेश देता है। इसी मानवीय भावना और सेवाभाव की अनुपम मिसाल पेश करते हुए पूर्व महापौर डॉ. सत्या पाण्डेय ने दीपावली का पर्व मंदबुद्धि एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ हर्षोल्लास से मनाया। इस अवसर पर उन्होंने सभी 49 बच्चों को टी-शर्ट, लोअर, मिठाइयां एवं फुलझड़ियां भेंट कीं तथा स्वयं बच्चों के साथ फुलझड़ी जलाकर उनकी खुशियों में सहभागी बनीं।कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था। डॉ. सत्या पाण्डेय ने प्रत्येक बच्चे से आत्मीयता के साथ मुलाकात की और उन्हें दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी तभी है, जब हम अपनी खुशियों में उन लोगों को भी शामिल करें, जिन्हें समाज में विशेष स्नेह, सहयोग और अपनत्व की आवश्यकता है।
इस अवसर पर एक और खास संयोग देखने को मिला। पूर्व महापौर डॉ. सत्या पाण्डेय के पुत्र का जन्मदिन भी था। बच्चों ने उन्हें टीका-चंदन लगाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। बच्चों का यह स्नेहपूर्ण आशीर्वाद और आत्मीयता कार्यक्रम का भावुक एवं यादगार क्षण बन गया।डॉ. सत्या पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि इन बच्चों के बीच आकर जो आत्मिक खुशी और सुकून मिलता है, उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। ये बच्चे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें भी प्यार, सम्मान, अपनत्व तथा खुशियों के समान अवसर मिलने चाहिए। दीपावली का असली अर्थ दूसरों के जीवन में खुशियों का दीप जलाना है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि कोई भी बच्चा अपने आपको अकेला या उपेक्षित महसूस न करे। इन बच्चों की मुस्कान ही हमारे लिए सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने समाज के सभी लोगों से अपील की कि त्योहारों और विशेष अवसरों पर जरूरतमंद बच्चों के साथ समय बिताएं और उनके जीवन में खुशियां लाने का प्रयास करें।कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि के रूप में मानवाधिकार संगठन एवं सेवा ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद रजी़ अपनी टीम के साथ शामिल हुए। उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। समाज के कमजोर, असहाय और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ त्योहार मनाना केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। डॉ. सत्या पाण्डेय ने इन बच्चों को उपहार देकर ही नहीं, बल्कि उनके साथ समय बिताकर और उनकी खुशियों में शामिल होकर एक प्रेरणादायक संदेश दिया है। मानवाधिकार संगठन एवं सेवा ट्रस्ट का उद्देश्य भी यही है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक प्रेम, सम्मान, सहयोग और अधिकारों की पहुंच सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि बच्चों के चेहरे पर आई मुस्कान ही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता है।
संरक्षक हसन जमाल उर्फ बबुआ भाई ने अपने संबोधन में कहा कि दीपावली प्रकाश, प्रेम, भाईचारे और मानवता का पर्व है। इस पर्व की सार्थकता तभी है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसकी खुशियों में बराबर का भागीदार बने। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दया की नहीं, बल्कि प्यार, सम्मान, प्रोत्साहन और बराबरी के अवसरों की जरूरत है। डॉ. सत्या पाण्डेय ने इन बच्चों के बीच दीपावली मनाकर समाज को एक अच्छा संदेश दिया है। ऐसे सेवा कार्यों से समाज में संवेदनशीलता और आपसी सहयोग की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि हमें केवल त्योहारों पर ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष इन बच्चों की शिक्षा, देखभाल, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम में मानवाधिकार संगठन एवं सेवा ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद रजी़, संरक्षक हसन जमाल उर्फ बबुआ भाई, महानगर उपाध्यक्ष मुशर्रफ अली, इनामुल हक, तबरेज अनवर, इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करने और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ हुआ। यह आयोजन इस संदेश के साथ यादगार बना कि दीपावली के दीप तभी सार्थक हैं, जब उनकी रोशनी समाज के हर उस चेहरे तक पहुंचे, जिसे खुशियों और अपनेपन की जरूरत है।
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