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पीडीए का कल्याण मतलब 95% हिंदुस्तान का उत्थान! सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा देने का संकल्प : अनुराग आज़ाद


 

शिक्षा, सम्मान, रोजगार और समान अवसर ही मजबूत भारत की असली पहचान; जब समाज के अंतिम व्यक्ति का होगा विकास, तभी देश बनेगा खुशहाल

लखनऊ डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं रमाबाई चेतना संस्थान, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग आज़ाद ने कहा कि पीडीए का कल्याण केवल किसी एक वर्ग का कल्याण नहीं, बल्कि देश की लगभग 95 प्रतिशत आबादी के उत्थान, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा व्यापक विचार है। पीडीए का उद्देश्य समाज के उन सभी वर्गों को समान अवसर, सामाजिक सम्मान और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिनकी आवाज लंबे समय तक व्यवस्था में अपेक्षित स्थान नहीं पा सकी अनुराग आज़ाद ने कहा कि “पीडीए का कल्याण मतलब 95% हिंदुस्तान का उत्थान” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, लोकतांत्रिक भागीदारी और समावेशी विकास का संकल्प है। जब तक गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़े, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, महिलाएं, नौजवान और वंचित समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने का बराबर अवसर नहीं मिलेगा, तब तक विकसित और समृद्ध भारत का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारतीय संविधान के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और सम्मान का अधिकार दिया। संविधान की मूल भावना यही है कि किसी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग, धर्म, लिंग अथवा आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। आज आवश्यकता है कि संविधान में दिए गए इन मूल्यों को केवल किताबों और भाषणों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उतारा जाए।

शिक्षा और रोजगार के बिना सामाजिक सशक्तिकरण अधूरा

अनुराग आज़ाद ने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। गरीब परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को सुरक्षा एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता और वंचित समुदायों को सम्मानजनक भागीदारी मिलनी चाहिए। शिक्षा ही वह शक्ति है, जिसके माध्यम से पीढ़ियों से चली आ रही असमानता और सामाजिक पिछड़ेपन को समाप्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आज देश के नौजवान रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य चाहता है। मजदूर सम्मानजनक जीवन चाहता है। महिलाएं सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता चाहती हैं। दलित, पिछड़े और वंचित समाज के लोग निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अपनी उचित भागीदारी चाहते हैं। इन सभी सवालों का समाधान सामाजिक न्याय और समान अवसरों की व्यवस्था को मजबूत करने में निहित है।

बाबा साहेब के विचारों से बनेगा समानता पर आधारित समाज

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और माता रमाबाई का जीवन संघर्ष, त्याग, शिक्षा और सामाजिक चेतना की प्रेरणा देता है। बाबा साहेब ने समाज को शिक्षित होने, संगठित रहने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का रास्ता दिखाया। माता रमाबाई का त्याग और संघर्ष भी हमें यह सिखाता है कि सामाजिक परिवर्तन की यात्रा में परिवार, शिक्षा और दृढ़ संकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि हमारा संस्थान बाबा साहेब के विचारों, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि युवाओं में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े, समाज में भाईचारा मजबूत हो और प्रत्येक नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझे।

सामाजिक न्याय ही राष्ट्र की वास्तविक प्रगति का आधार

अनुराग आज़ाद ने कहा कि देश की तरक्की का आकलन केवल बड़ी इमारतों, सड़कों और आर्थिक आंकड़ों से नहीं होना चाहिए, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है। जिस दिन गरीब का बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त करेगा, किसान को सम्मान मिलेगा, नौजवान को रोजगार मिलेगा, महिलाओं को बराबरी का अवसर मिलेगा और वंचित समाज को निर्णय प्रक्रिया में उचित भागीदारी मिलेगी, उसी दिन वास्तविक विकास की तस्वीर दिखाई देगी।उन्होंने आगे कहा कि पीडीए की भावना सामाजिक एकता, संवैधानिक अधिकारों, सम्मान और समान भागीदारी को मजबूत करने से जुड़ी है। समाज को जाति और भेदभाव की दीवारों से ऊपर उठकर शिक्षा, जागरूकता, भाईचारे और न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।अंत में अनुराग आज़ाद ने कहा कि हमारा संकल्प ऐसा भारत बनाने का है, जहां किसी बच्चे का भविष्य उसकी आर्थिक स्थिति से तय न हो, किसी युवा की प्रतिभा अवसरों के अभाव में दम न तोड़े और किसी नागरिक को अपने सम्मान तथा अधिकारों के लिए संघर्ष न करना पड़े। बाबा साहेब के संविधान और सामाजिक न्याय के विचारों को मजबूत करना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है।

पीडीए का कल्याण होगा, तो देश का उत्थान होगा। समाज के अंतिम व्यक्ति को सम्मान और अधिकार मिलेगा, तभी भारत वास्तव में मजबूत, समृद्ध और खुशहाल बनेगा।

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