लखनऊ। डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में शिक्षा, समानता तथा जागरूकता को बढ़ावा देने को लेकर डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं रमाबाई चेतना संस्थान उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग आज़ाद ने महत्वपूर्ण संदेश दिया।
अनुराग आज़ाद ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी समाज के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को समझने, संविधान को जानने और समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने की ताकत है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने हमेशा शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का मजबूत आधार माना। जब व्यक्ति शिक्षित और जागरूक होता है, तो वह अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर तरीके से समझ सकता है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर युवाओं को शिक्षा के प्रति गंभीर होकर आगे बढ़ना चाहिए।
अनुराग आज़ाद ने कहा कि संगठित समाज ही अपने अधिकारों और समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से प्रभावी ढंग से सामने रख सकता है। संगठन का उद्देश्य समाज में एकता, भाईचारा और जागरूकता को मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर शिक्षा, संविधान और सामाजिक समानता के मूल्यों को समझें।
उन्होंने आगे कहा कि संघर्ष का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों तथा सामाजिक न्याय के लिए निरंतर प्रयास करना है। बाबा साहेब का जीवन स्वयं इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा, विचार और संवैधानिक रास्ते के माध्यम से बड़े सामाजिक बदलाव की दिशा में काम किया जा सकता है।
प्रदेश अध्यक्ष अनुराग आज़ाद ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि डॉ. अंबेडकर के विचारों को केवल पढ़े ही नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी उतारे, तो समाज में शिक्षा, समानता, सम्मान और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” केवल एक नारा नहीं, बल्कि जागरूक और समानतापूर्ण समाज की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश है। उन्होंने लोगों से संविधान के मूल्यों को समझने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।
अनुराग आज़ाद ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को घर-घर तक पहुंचाना और नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, योगदान और संवैधानिक विचारों से परिचित कराना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
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