लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा पुरानी पेंशन बहाली, वित्तविहीन शिक्षकों के लिए मानदेय की व्यवस्था, शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान को लेकर किए गए हालिया ऐलानों के बाद शिक्षा और कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं। 28 सितंबर 2026 को लखनऊ में हुई बैठक के बाद अखिलेश यादव ने इन विषयों पर कई घोषणाएं की थीं।
प्रस्तावित बयान में अनिल यादव जी ने कहा:
“शिक्षक केवल नौकरी करने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और आने वाली पीढ़ी का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षकों को सम्मान, सुरक्षा और उचित आर्थिक व्यवस्था मिलना बेहद आवश्यक है। पुरानी पेंशन की बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय की व्यवस्था जैसे मुद्दे लाखों परिवारों से जुड़े हुए हैं।”
उन्होंने कहा कि वित्तविहीन विद्यालयों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। उनके भविष्य और सम्मान को लेकर स्थायी व्यवस्था बनना शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
अनिल यादव जी के प्रस्तावित बयान के अनुसार, “शिक्षकों की समस्याओं का समाधान केवल चुनावी घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी नीतियां बननी चाहिए जिनसे शिक्षक को सेवा सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का भरोसा मिले।”
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव द्वारा शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सामने रखना इस बात को दर्शाता है कि शिक्षा व्यवस्था में काम करने वाले लोगों की समस्याओं पर सार्वजनिक चर्चा आवश्यक है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन बहाली के साथ वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय, शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, शिक्षामित्रों और मदरसा तथा संस्कृत विद्यालयों से जुड़े विषयों पर भी घोषणाएं की हैं।
“शिक्षक मजबूत होगा तो शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी”
अनिल यादव जी के प्रस्तावित बयान में आगे कहा गया:
“हमारा मानना है कि किसी भी प्रदेश की प्रगति का रास्ता मजबूत शिक्षा व्यवस्था से होकर जाता है। जब शिक्षक आर्थिक और सामाजिक रूप से सुरक्षित होगा, तभी वह और बेहतर तरीके से विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा दे सकेगा। इसलिए शिक्षकों के सम्मान और उनके अधिकारों से जुड़े हर सकारात्मक प्रयास का स्वागत होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों, वित्तविहीन शिक्षकों, मदरसा शिक्षकों और अन्य शिक्षा कर्मियों की समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत प्रत्येक वर्ग की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
अनिल यादव जी ने कहा:“शिक्षा को राजनीति से ऊपर रखकर देखना चाहिए। शिक्षक समाज का मार्गदर्शक है। उसके सम्मान और अधिकारों की रक्षा होगी तो उसका सीधा प्रभाव बच्चों की शिक्षा और प्रदेश के भविष्य पर पड़ेगा।”
उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन, शिक्षक सेवा सुरक्षा, मानदेय और शिक्षामित्रों से जुड़े मुद्दे केवल कर्मचारियों के मुद्दे नहीं हैं, बल्कि इनके साथ लाखों परिवारों और विद्यार्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है।
अखिलेश यादव के ऐलानों पर जोर
हालिया रिपोर्टों के अनुसार अखिलेश यादव ने कहा है कि सरकार बनने पर पुरानी पेंशन बहाल की जाएगी और वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय के लिए बजट में व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने शिक्षकों की सेवा सुरक्षा तथा धारा 12, 18 और 21 से जुड़े प्रावधानों को बहाल करने की बात भी कही है।
प्रस्तावित बयान के अंत में अनिल यादव जी ने कहा:
“शिक्षक का सम्मान, शिक्षा का सम्मान है। प्रदेश के विकास के लिए जरूरी है कि शिक्षकों की आवाज सुनी जाए, उनकी समस्याओं का समाधान हो और उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य मिले। शिक्षा मजबूत होगी तो समाज मजबूत होगा और समाज मजबूत होगा तो प्रदेश आगे बढ़ेगा।”
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